गुरुवार, 27 नवंबर 2008

बवाल हुआ .....

दिलों की बज़्म में, हमको बड़ा मलाल हुआ !

वफ़ा का ज़िक्र छिड़ा था के बस, बवाल हुआ !!

---बवाल

सोमवार, 24 नवंबर 2008

क़सीदे.....

आपकी तारीफ़ में, जब हम क़सीदे पढ़ चले !

तालियों के सिलसिले, तड़ तड़ तड़ा तड़ तड़ चले !!

---बवाल

क़सीदे = प्रशंसात्मक -पद्य या गीत

शुक्रवार, 21 नवंबर 2008

सफ़्हए-उल्फ़त ......

जहाँ से तुमको पढ़ा नहीं था,

वहाँ से लिखने को अब चला हूँ !

नहीं...., शिकन ना पड़ेगी मुझ पर,

सफ़्हए-उल्फ़त का सिलसिला हूँ !!

---बवाल

शिकन = सलवट, मोड़-तोड़, फटना
सफ़्हए-उल्फ़त = प्यार के पन्ने