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बाबू जी ने गर इतनी जायदाद को छोड़ा नहीं होता
मेरे अपने भाई ने कभी,मुझसे मूँह मोड़ा नहीं होता..
जोड़ दे जो मकान में आई ऐसी दरारें भी सीमेन्ट से....
ढूँढता हूँ मैं बेकरार हो, आज ऐसे किसी ठेकेदार को!!!
-समीर लाल ’समीर’
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मैं सब्रो-रंगे-सुकून में हूँ , मुझे संभालो मेरे सहारों
सबब है इस इल्तिजा के पीछे, के चल बसा हूँ ओ मेरे यारों
---बवाल