हरदिल-अज़ीज़ प्रभु यीशु के पावन अवतरण पर उनकी शान में---
अब तक सलीब पर तो, मिलती रही सज़ाएँ !
पर अब सलीब से ही, महकीं हैं ये फ़िज़ाएँ !!
---बवाल
सलीब = सूली
भावार्थ :-
जब तक यीशु सूली पर नहीं चढ़े थे तब तक तो सूली (क्रॉस) , पर क्रूरता पूर्वक सज़ाएँ दी जाती रहीं. मगर उनके बाद, अब वही सूली (क्रॉस), पवित्रता को प्राप्त करके, तमाम आलम को शान्ति और अमन का संदेश देकर पल्लवित कर रही है.
नाग-पञ्चमी (चन्दन चाचा के बाड़े में)
1 वर्ष पहले

