रविवार, 13 जुलाई 2008

मोम के बाजू

माननीय अमरसिंह साहेब के अथक प्रयासों पर :-

उसे कह दो के ये ऊँचाइयाँ मुश्किल से मिलती हैं,
वो सूरज के सफ़र में मोम के बाज़ू लगाता है !
-राहत इन्दौरी

शनिवार, 12 जुलाई 2008

क़त्ले-आम

आज के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखिये ये शेर -

तंग आ चुके हैं लोग मुसलसल सुकून से,
आलमपनाह शहर में अब, क़त्ले-आम हो !

मुसलसल = लगातार

ख़ुदा का नाम चलता है ...............

न पैमाने खनकते हैं, न दौरे-जाम चलता है !
नई दुनिया के रिन्दों में, ख़ुदा का नाम चलता है !!

-शकील बदायूनी