रविवार, 6 जुलाई 2008

गलबहियाँ

काँग्रेस और समाजवादी पार्टी की अंदाजे-मोहब्बत पर बद्र कितने वाजिब लगते हैं !
देखिये -
मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला,
अगर गले नहीं मिलता, तो हाथ भी न मिला !!

शुक्रवार, 4 जुलाई 2008

उड़नतश्तरी वाले समीर लाल जी की लेटेस्ट पोस्ट पर टिप्पणि

लाल मदारी डुग-डुग लेकर, खेल दिखाने आता है !
खेल-खेल में बड़ी-बड़ी बातें, कर जाने आता है !
हाँ बतलाने, हाँ गिनवाने, हाँ मिलवाने आता है !

हिक़मत, हिम्मत, हैरत से हँस-रंग सजाने आता है !!

और इनकी आँखों के वास्ते "जोश" से --

ये बात, ये तबस्सुम, ये नाज़, ये निगाहें !
आख़िर तुम्हीं बताओ, क्यूँकर न तुमको चाहें ?

गुरुवार, 3 जुलाई 2008

ख़स्ता ख़स्ता

ख़स्ताजाँ, ख़स्ताजिगर है,

ख़स्तादिल औ ख़स्ताहाल !

जिसको दुनिया कह रही है,

ये ही करता है - बवाल