काँग्रेस और समाजवादी पार्टी की अंदाजे-मोहब्बत पर बद्र कितने वाजिब लगते हैं ! देखिये - मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला, अगर गले नहीं मिलता, तो हाथ भी न मिला !!
लालमदारी डुग-डुग लेकर, खेल दिखाने आता है ! खेल-खेल में बड़ी-बड़ी बातें, कर जाने आता है ! हाँ बतलाने, हाँ गिनवाने, हाँ मिलवाने आता है ! हिक़मत, हिम्मत, हैरत से हँस-रंग सजाने आता है !!
और इनकी आँखों के वास्ते "जोश" से --
ये बात, ये तबस्सुम, ये नाज़, ये निगाहें ! आख़िर तुम्हीं बताओ, क्यूँकर न तुमको चाहें ?