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क्या ज़रूरी है के, शोलों की मदद ली जाए ?जिनको जलना है वो, शबनम से भी जल जाते हैं ! ---नामालूम
कुछ दिन पहले समीरलाल जी के बारे में एक पोस्ट पर श्री संजय बेंगाणी जी ने टिप्पणी देते हुए पूछा था के लाल-एन-बवाल के उपरोक्त शीर्षक का अर्थ समझाया जावे । दरअस्ल हम इसी इंतज़ार में थे के कोई तो हो जो इस बात को पकड़ ले और संजय जी ने आख़िर वो काम कर दिया । अब सवाल यह है के बात छोटी नहीं बहुत मोटी है। लम्बी है। गहरी है। ऊँची है। ना जाने क्या क्या है। इसीलिये जम जम कर होगी । और सब मिलकर करेंगे । क्या मीतजी, नीरजजी, डॉक्टर अमर, सीमाजी, दिनेशजी, रख्शंदा जी, महेंद्र मिश्राजी, हमारे अन्य प्रिय ब्लोग्गेर्स और हाँ हाँ महामना समीरलाल जी इस चर्चा में जुटना पसंद करेंगे ? कविराज राकेश जी इस बारे में क्या सोचते हैं देखते हैं। हमें सब चाहिए, हाँ सब के सब चाहिए । क्योंके आप सब लश्करे-हिंद के जवान हैं । हो सकता है कुछ नया निकल कर बाहर आवे । हो सकता है बवाल हो । और या फिर कमाल हो। ----क्या कहें दीदावरी किस दर्जा हैरानी में है ? आजकल खुर्शीद इक जुगनू की दरबानी में है ! खुर्शीद = सूरज
दिल-दिमाग़ दम साधे देखा किया, लो बयाँ ज़बानी ?किस किस को किस किया कहाँ कैसे क्या कहें कहानी !----बवाल एक चुम्बन ही तुम्हारा, वो असर कर जायेगा !या तो बन्दा जी उठेगा, या के बस मर जायेगा !!----बवाल