रविवार, 7 सितंबर 2008

जल जाते हैं

क्या ज़रूरी है के, शोलों की मदद ली जाए ?
जिनको जलना है वो, शबनम से भी जल जाते हैं !

---नामालूम

शनिवार, 6 सितंबर 2008

इंडिया देट इज़ भारत विच इस नॉट हिन्दुस्तान

कुछ दिन पहले समीरलाल जी के बारे में एक पोस्ट पर श्री संजय बेंगाणी जी ने टिप्पणी देते हुए पूछा था के लाल-एन-बवाल के उपरोक्त शीर्षक का अर्थ समझाया जावे । दरअस्ल हम इसी इंतज़ार में थे के कोई तो हो जो इस बात को पकड़ ले और संजय जी ने आख़िर वो काम कर दिया । अब सवाल यह है के बात छोटी नहीं बहुत मोटी है। लम्बी है। गहरी है। ऊँची है। ना जाने क्या क्या है। इसीलिये जम जम कर होगी । और सब मिलकर करेंगे । क्या मीतजी, नीरजजी, डॉक्टर अमर, सीमाजी, दिनेशजी, रख्शंदा जी, महेंद्र मिश्राजी, हमारे अन्य प्रिय ब्लोग्गेर्स और हाँ हाँ महामना समीरलाल जी इस चर्चा में जुटना पसंद करेंगे ? कविराज राकेश जी इस बारे में क्या सोचते हैं देखते हैं। हमें सब चाहिए, हाँ सब के सब चाहिए । क्योंके आप सब लश्करे-हिंद के जवान हैं । हो सकता है कुछ नया निकल कर बाहर आवे । हो सकता है बवाल हो । और या फिर कमाल हो।

----क्या कहें दीदावरी किस दर्जा हैरानी में है ?
आजकल खुर्शीद इक जुगनू की दरबानी में है !

खुर्शीद = सूरज

गुरुवार, 4 सितंबर 2008

किस बनाम चुम्बन (सन्दर्भ : समीरलाल जी की पोस्ट २६ अगस्त)

दिल-दिमाग़ दम साधे देखा किया, लो बयाँ ज़बानी ?
किस किस को किस किया कहाँ कैसे क्या कहें कहानी !
----बवाल

एक चुम्बन ही तुम्हारा, वो असर कर जायेगा !
या तो बन्दा जी उठेगा, या के बस मर जायेगा !!
----बवाल