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गुरुवार, 5 मई 2011

मुझसे मूँह मोड़ा नहीं होता.....




बाबू जी ने गर इतनी जायदाद को छोड़ा नहीं होता
मेरे अपने भाई ने कभी,मुझसे मूँह मोड़ा नहीं होता..

जोड़ दे जो मकान में आई ऐसी दरारें भी सीमेन्ट से....
ढूँढता हूँ मैं बेकरार हो, आज ऐसे किसी ठेकेदार को!!!


-समीर लाल ’समीर’

सोमवार, 10 नवंबर 2008

सवाले-खु़श्क को ..............

सवाले-खु़श्क को जवाब है, फुहारों का !

भँवर में ज़िक्र भी तो छेड़िए, किनारों का !!

---बवाल

खु़श्क = रूखा, नकारात्मक