पिछले ११ सितम्बर की पोस्ट के बाद कुछ लिखने का वक्त ना मिल पाया । क्या बतलायें थोड़ी बहुत वक़ालत भी तो करनी पड़ जाती है न इस ब्रॉड बैंड के बिल का ख़र्च निकालने के वास्ते। पर इस गैप पर कुछ दोस्त घबराकर पूछ बैठे । क्या बात है ? मर मिटे क्या नाइन इलेवन पर ? हो तो जल्दी नज़र आओ भाई ।
उनकी शंका समाधान के लिए किसी शायर के ये शेर शायद पसंद आयें -
कौन कहता के, मौत आई तो मर जाऊंगा ?
मैं तो दरिया हूँ, समंदर में उतर जाऊंगा !!
ख़ुद पुकारेगी जो मंज़िल, तो ठहर जाऊंगा !
वरना खु़द्दार मुसाफ़िर हूँ, गुज़र जाऊँगा !!
नाग-पञ्चमी (चन्दन चाचा के बाड़े में)
1 वर्ष पहले
