शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010

माटी की गागरिया................(बवाल)


दुपहरिया बीत चली,

पनघट पर रीत चली !

पनिहारिन फिर लौटी,

भर रस की सागरिया !

माटी की गागरिया !!


--- पद्मश्री पं. भवानी प्रसाद तिवारी

!!  हमारे उस्ताद लुक़्मान जी के भी उस्ताद और संस्कारधानी के प्रथम महापौर पद्मश्री पं. भवानी प्रसाद तिवारी की पुण्य जयंती १२ जनवरी पर उन्हें

शत् - शत् श्रद्धा-सुमन !!

और

!! आप सबको महाशिवरात्रि पर्व पर ढेर सारी शुभकामनाएँ !!


कचनार सिटी जबलपुर के ७६ फ़ीट ऊँचे शिवजी


भोला नई माने रे नई माने, मचल गए भंगिया (भाँग) पै

सोमवार, 18 जनवरी 2010

मैं जनाज़ा हो चला.............................(बवाल)

दोस्त तेरी महफ़िलों से, जी मेरा,   ले भर गया

मैं जनाज़ा हो चला, ऐलान कर दे,   मर गया



काश, दिल का दर्द तू, पहले बता देता कभी !

क्या मैं तेरे सामने, ज़िंदा नहीं होता अभी  ??

गुरुवार, 14 जनवरी 2010

चचा लुक़्मान ज़िंदाबाद : बवाल का सलाम

कुछ ऐसी तसव्वुर की, महफ़िल सजाएँ

जहाँ हों वहीं से, उन्हें खैंच लाएँ 

क़व्वाले-आज़म तहज़ीबिस्तान

चचा लुक़्मान



हमारे उस्ताद की जयंती

१४ जनवरी १९२५ (मकर संक्राति) पर

उन्हें ‍शत् शत् नमन

(महाप्रयाण :- २७ जुलाई २००२)

पद्मश्री पंडित भवानी प्रसाद तिवारी जी की इन पंक्तियों के साथ

मधुर बीन तेरी स्वरित तार मेरे

बहुत जोड़ता हूँ, नहीं जोड़ पाता

और

हमारे श्रद्धासुमन


चोटों पे चोट खाना, खाकर वो भूल जाना

मुझे मुआफ़ करते करते, अल्लाह बन न जाना


एहले ज़बाँ का मुझको, वो इल्म ना हो शायद

तेरी कहन को लेकिन, हूँ जानता निभाना

---बवाल