शुक्रवार, 3 जुलाई 2009

ख़ुद ही पड़ा ........................(बवाल)

क़ातिल अदा का तेरा, क्या ख़ूब था निभाना !
मैं फ़ौत हूँ ये मुझको, ख़ुद ही पड़ा बताना !!

---बवाल
फ़ौत = मृत

32 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

सुभान अल्लाह, जनाब बहुत गहरी बात कह दी.
धन्यवाद

"मुकुल:प्रस्तोता:बावरे फकीरा " ने कहा…

Bahut khoob sir ji

Udan Tashtari ने कहा…

और कौन बतायेगा भई!!

बेहतरीन शुरुवात है!!

विवेक सिंह ने कहा…

अगर सच पूछें तो मैं इसका मतलब समझ नहीं पा रहा हूँ , आशा है थोड़ा क्लियर करेंगे !

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

कैसे था कहाँ था इतने दिन कुछ पता न चला।
फौत समझा था जिसे शेर कहता हुआ मिला ।।

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

सुभान अल्लाह..बहुत लाजवाब.

पर हुजुर कहां थे इतने दिनों तक? उसका भी हिसाब पेश किया जाये.:)

रामराम.

Parul ने कहा…

bahut acchhey...

seema gupta ने कहा…

accha kiya btaa diya ha ha ha ha ha ...

regards

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत खूब

‘नज़र’ ने कहा…

आज फौत का मानी पता चला, बहुत शे'र

---
विज्ञान । HASH OUT SCIENCE

ओम आर्य ने कहा…

बहुत बढिया..

MANVINDER BHIMBER ने कहा…

गहरे मे छुपी भावनाओं की बेजोड प्रस्तुति अन्दर छुपी भावनायें हमेशा ही ऐसी नज़्में घडती रेहती हैं

शशिकान्त ओझा ने कहा…

वाह वाह क्या बात कही हुज़ूरे-वाला । हम विवेक सिंह जी से यहाँ पूरी तरह इत्तेफ़ाक रखते हैं हा हा ।
के आपके इस ज़बरदस्त शेर का मतलब ज़रूर समझाया जावे .....

रूदादे-फ़ौत क्या अब इस तरह बयाँ होगी ?
के जो अयाँ करे, बवाल की ज़ुबाँ होगी !!

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत ही जबरजस्त शेर है बबाल जी
तो श्रीमान जी का गृह नगर आगमन हो गया है . ..

Prem Farrukhabadi ने कहा…

bawaal bhai,
apka sher sava sher se kam nahin.bahut hi sundar

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

der aayd-durust aayad.

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

bahut sundar..

"मुकुल:प्रस्तोता:बावरे फकीरा " ने कहा…

भाई जी कमाल है बवाल
कब ला रहें हैं नया माल

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

वाहवा.. वाहवा...

RAJ SINH ने कहा…

आप आये बहार आयी
फ़ौत हों आपके दुश्मन मेरे भाई !

महामंत्री - तस्लीम ने कहा…

लाबवाब शेर। जितनी तारीफ की जाए कम है।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Suman ने कहा…

nice

गौतम राजरिशी ने कहा…

बस एक आह...!

ये इतने दिनों के लिये कहाँ गुमशुदा थे वकील साब?

"अर्श" ने कहा…

बड़े भाई को नमस्कार,
देर आये दुरुस्त आये ... क्या तेवर क्या नजाकत ,क्या होश मंद आये ...जो शे'र आप पढ़े सबको पसंद आये ....

बहोत बहोत बधाई इस खुबसूरत शे'र के लिए....
और हाँ आपने जो गुरु जी के ब्लॉग पे मेरी तारीफ़ करी है उसके लिए आभार हूँ मगर शर्म से पानी पानी के मैं ऐसा नहीं हूँ ....

अर्श

jamos jhalla ने कहा…

vakil ho isiliye maqtool hokar bhee katil ko katl karte ho aur haath mai shamsheer bhee nahi.

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

bawal saheb

bahut sundar sher...just amazing ...saara fasana aa gaya ji ..

Aabhar

Vijay

Pls read my new poem : man ki khidki
http://poemsofvijay.blogspot.com/2009/07/window-of-my-heart.html

sm ने कहा…

excellent

Murari Pareek ने कहा…

sirji laajwab!!

Prem Farrukhabadi ने कहा…

bawaal bhai,
ek sher se man nahin bharta.aur kuchh ho jaye.

कंचनलता चतुर्वेदी ने कहा…

bahut sundar....

हया ने कहा…

thanks for visiting my blog

aagaaz ko anjam tak aane to dijiye
bahut khub.

haya

'अदा' ने कहा…

आपकी अदा कमाल....
फ़ौत होकर भी बवाल...