शुक्रवार, 3 अक्तूबर 2008

और नीरजजी की ग़जल के मक्ते से ससम्मान ......

क्या ख़बर हिस्से में अब कितनी बची है, जिंदगी ?
इसलिए बेखौफ़ करता हूँ मैं तेरी बन्दगी !!

----नीरज
----......

3 टिप्‍पणियां:

दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…

न भी करें तो क्या? अब क्या कर लेगा?

seema gupta ने कहा…

इसलिए बेखौफ़ करता हूँ मैं तेरी बन्दगी !!
' wah, bhut sunder alfaj'

regards

bavaal ने कहा…

शुक्रिया जी बहुत बहुत आप लोगों का