बुधवार, 22 अक्तूबर 2008

सभी तरफ़ तो बवाल है जी .......

ये राज कैसा ? वो ताज कैसा ? सभी तरफ़ तो बवाल है जी !

मगर यही है वतन भी मेरा, इसी का मुझको मलाल है जी !!

----बवाल

5 टिप्‍पणियां:

श्रीकांत पाराशर ने कहा…

Aapki do linen bhi antarman men baval khada karne ke liye kafi hain.Achhi lagi panktiyan.

bavaal ने कहा…

Bahut bahut Shukriya aapka shrikaantjee.

seema gupta ने कहा…

"hmmm kitna bhee mlal kr lein aap rhenge to bval he na.... "

Regards

नीरज गोस्वामी ने कहा…

बेहतरीन...वाह बवाल साहेब वाह...
नीरज

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा ने कहा…

vah babaal sab apne fir kar diya kamal . bahut hi umda samayik. dhanyawad.