सोमवार, 15 दिसंबर 2008

रोज़ा-ए-खा़मोश... (मौन का उपवास)

{सीमाजी की ग़ज़ल की ताज़ीम}

इश्क़ पर ईमान, ले आने को वो पुरजोश था

लोग कहते रह गए 'बवाल,' दल्क़पोश था

दस्तरख़्वाँ पे जिसके, सारा आलम, पेशेनोश था

कूच जन्नत कर गया वो, रोज़ा-ए-ख़ामोश था

---बवाल

लुगत :-
ताज़ीम = आदर
पुरजोश = जोश से भरा हुआ
दल्क़पोश = फ़कीर, सूफ़ी
दस्तरख़्वाँ = खाना खाने के लिए बिछी हुई चादर
पेशेनोश = उपलब्ध
रोज़ा-ए-ख़ामोश = मौन का उपवास (मौनव्रत)

17 टिप्‍पणियां:

Arvind Mishra ने कहा…

वाह !

seema gupta ने कहा…

" इस आदर सम्मान के लिए दिल से शुक्रगुजार हूँ"

Regards

"अर्श" ने कहा…

बड़े भाई नमस्कार,
बहोत ही बढ़िया ताज़ीम दी है आपने बहोत खूब और बेहद उम्दा भी ... ढेरो बधाई कुबूल करें...


अर्श

नीरज गोस्वामी ने कहा…

कूच जन्नत कर गया वो, रोज़ा-ए-ख़ामोश था
सुभान अल्लाह....भाई वाह....
नीरज

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

कूच जन्नत कर गया वो, रोज़ा-ए-ख़ामोश था
बहुत सुंदर, बवाल जी!

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

भाई मन्त्र्मुग्ध हूं ! लाजवाब !

राम राम !

विवेक सिंह ने कहा…

बढिया उर्दू कर दी :)

विनय ने कहा…

सुन्दर अनुभूति है!

समयचक्र - महेद्र मिश्रा ने कहा…

बेहद उम्दा.बधाई....

sandhyagupta ने कहा…

Bahut khub.

Udan Tashtari ने कहा…

आनन्द आ गया-अति सुन्दर. क्या बात है!!!

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

behtreen bawaal bhai.......

डॉ .अनुराग ने कहा…

दस्तरख़्वाँ पे जिसके, सारा आलम, पेशेनोश था
कूच जन्नत कर गया वो, रोज़ा-ए-ख़ामोश था


क्या खूब कहा .......बहुत अच्छे !

Irshad ने कहा…

प्रिय मित्र आपकी राय सर आंखों पर, और समीर जी मेरे लिये बेहद सम्मानीय है। लेकिन मैं एक सिलसिला इसी तरह के लेखन को लेकर चला रहा हूं और सौभाग्य है कि इसकी शुरूआत मैंने समीर जी से की है अगली कड़ी में एक मशहूर ब्लॉगर शमा का जिक्र करने वाला हूं आप पढ़ियेगा जररू।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

बहुत बहुत खूबसूरत शेरों के लिए बहुत बहुत बधाई।

अनुपम अग्रवाल ने कहा…

वो पुरजोशी
बवाल की दल्कपोशी
ये तो आलम है
जब रोजा ऐ खामोशी .

bhoothnath(नहीं भाई राजीव थेपडा) ने कहा…

अपन अच्छी ग़ज़लें कहना तो नहीं जानते मियाँ बवाल............हाँ मगर पढ़ना जानते हैं.......और दाद देना भी.......बशर्तें हमें खुजली हो जाए.....और खुजली होने पर हम सामने वाले को खूझा (खीझा नहीं कह रहा भाई.....!!)ही देते हैं.........आप तो वाकई बवाल हो..........अब पहले की तरह नेट पर नहीं आता.........नहीं तो बार-बार खुझाता.........भाई वाकई बवाल हो आप.........!!सच यार.....(छोटे हो बड़े.......!!)