मंगलवार, 4 नवंबर 2008

नहीं रुकेगा .......

न रोको अब, के नहीं रुकेगा,

वो उड़ चला है, अजब की जानिब !

ग़ज़ब की रफ़्तार, है पकड़ ली,

औ, राह जाती है, रब की जानिब !!

----बवाल

जानिब = ओर, सम्त, दिशा में
औ = और

14 टिप्‍पणियां:

Parul ने कहा…

बहुत अच्छे

Dineshrai Dwivedi दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…

बहुत खूब बवाल भाई!

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन एवं सन्नाट. गज़ब, बवाल!!

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" ने कहा…

रब की जानिब चलो चला जाए ,हर-एक-राह उधर की ही है !
सवाल कर कर के वक्त न गवाँ ,नियाज़मंद ये सलाह उधर की है

seema gupta ने कहा…

roke se bhee kub ruka hai, jo udh chla hai ajb keee janeeb,
raftaar kee raftaar see agey bdha hai...beshak manjil milege rub ke janeeb...

regards

समयचक्र - महेद्र मिश्रा ने कहा…

khoobasoorat Abhivyakti. vah kya bat hai babal ji.

अवाम ने कहा…

सुंदर रचना सुंदर सोच

PREETI BARTHWAL ने कहा…

बहुत अच्छा

अनुपम अग्रवाल ने कहा…

ग़ज़ब की रफ़्तार ली है, अजब की जानिब !
न रोको अब, राह जाती है, रब की जानिब !!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

सही बात कही सर ।
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आपकी इस पोस्ट की हलचल आज यहाँ भी है

Dorothy ने कहा…

ग़ज़ब की रफ़्तार ली है, अजब की जानिब !
न रोको अब, राह जाती है, रब की जानिब !!

बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
सादर,
डोरोथी.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूब ..

रेखा ने कहा…

ये शेर तो बवाल है ....

रेखा ने कहा…

ये शेर तो बवाल है ....