सोमवार, 10 नवंबर 2008

सवाले-खु़श्क को ..............

सवाले-खु़श्क को जवाब है, फुहारों का !

भँवर में ज़िक्र भी तो छेड़िए, किनारों का !!

---बवाल

खु़श्क = रूखा, नकारात्मक

13 टिप्‍पणियां:

manvinder bhimber ने कहा…

सवाले-खु़श्क को जवाब है, फुहारों का !

भँवर में ज़िक्र भी तो छेड़िए, किनारों का !!

kya baat hai

seema gupta ने कहा…

"fhuhron se svale-khushk behla nahee krty...
jo bhavrn mey hon, vo kenaron pe fir kabhee tehla nahee krtyn..."

Regards

संजीव तिवारी ने कहा…

वाह बहुत खूब ।

समयचक्र - महेद्र मिश्रा ने कहा…

बहुत बढ़िया बबाल जी .
हम तो भंवरो में
ही तेरा करते है
हा हा हा

समयचक्र - महेद्र मिश्रा ने कहा…

बहुत बढ़िया बबाल जी .
हम तो भंवरो में
ही तैरा करते है
हा हा हा

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

वकील साहब,
बहुत उम्द्दी रचना. कम शब्दों में बड़ी बात.
मैं तो इसे यूँ समझ रहा हूँ (क्योंकि आप पेशे से वकील हैं)................
भंवर में फसे लोगो को ज्यों ही किनारे पर आप ही ले कर आते हैं.
तभी उनके खुश्क चेहरों पर खुशी की फूआर नज़र आती है.

चन्द्र मोहन गुप्त

मीत ने कहा…

आइये बात करें चाँद के सितारों के
ऐन तूफानों में अब ज़िक्र हो सहारों का

makrand ने कहा…

bahut accha

Parul ने कहा…

waah!!

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा!! वाह!

अनुपम अग्रवाल ने कहा…

सलामे इश्क को...........
सलामे इश्क को जवाब है ,नजारों का !
चाँद का ज़िक्र करें,छोडिये,सितारों का !!

PREETI BARTHWAL ने कहा…

बहुत खूब बवाल जी

"अर्श" ने कहा…

वह क्या बात कही साहब आपने बहोत खूब ,मज़ा आगया ..