शनिवार, 12 जुलाई 2008

क़त्ले-आम

आज के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखिये ये शेर -

तंग आ चुके हैं लोग मुसलसल सुकून से,
आलमपनाह शहर में अब, क़त्ले-आम हो !

मुसलसल = लगातार

4 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

समसमायिक!

दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…

शहर और आस पास के सभी आम कत्ल हो चुके हैं। अब तो दूसरे प्रान्तों से बिकने चले आ रहें हैं। मगर नस्लें बेस्वाद हैं।

मुनीश ( munish ) ने कहा…

kya khoooooooooooob!

advocate rashmi saurana ने कहा…

very nice.