गुरुवार, 3 जुलाई 2008

ख़स्ता ख़स्ता

ख़स्ताजाँ, ख़स्ताजिगर है,

ख़स्तादिल औ ख़स्ताहाल !

जिसको दुनिया कह रही है,

ये ही करता है - बवाल

6 टिप्‍पणियां:

महेंद्र मिश्रा ने कहा…

दमादम खस्त कलंदर .सब खस्ताहाल..... क्या बात है . बहुत बढ़िया पंडित जी

प्रभाकर पाण्डेय ने कहा…

नमस्कार। गागर में सागर। बहुत ही सुंदर प्रस्तुति।

Udan Tashtari ने कहा…

आ गये बाबू. जमाये रहो माहौल, मेरे बवाल!!

bavaal ने कहा…

Shukriya Jee Shukriya.

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 12/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

बढ़िया बवाल....
सादर.