शुक्रवार, 20 जून 2008

नफ़ा-नुक्सान

चिट्ठाजगत


दास्ताँ नुक्सान की, अब नफ़े में क्या कहूँ ?
इक लुग़त की बात को, इक सफ़े में क्या कहूँ ?


लुग़त = शब्दकोष

2 टिप्‍पणियां:

महेंद्र मिश्रा ने कहा…

बहुत बढ़िया नुकसान होने पर चिल्लाते है
फायदा होने पर सभी चुप्पी साध जाते है .
बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति आभार. नियमित जरुर लिखे.

bavaal ने कहा…

Panditjee aapka bahut bahut aabhar jo aapne sher ka marm samjha.