गुरुवार, 12 जून 2008

उड़ने वाली चीजों को.......

मुट्ठी में ये भी रखते हैं, उड़ने वाली चीज़ों को !
क्यूँकर नष्ट किया करते हम, इतने प्यारे बीजों को !!


नैतिकता बस छोड़ पढ़ाते, घुड़दौड़न-लड़ना-तरना !
कम्प्यूटर-इंग्लिश-मोबाइल, ड्राइविंग और सर्फिंग करना !!


बचपन में बचपन मुरझाये, ऐसी जुगत लगाते हम !
अदब-क़ाएदा ताक पे रखकर, ज़िन्दा इन्हें बनाते बम !!



इंतिका़म तहज़ीब भी लेगी, देखना इक दिन नस्लों से !
धोना होगा हाथ हमें भी, खड़ी हुई इन फ़स्लों से !!

लाल करें बव्वाल कभी ना, इतना मर्म तो जाने हम !
बहुत हो चुका, चलो चल पड़ें, पालक-धर्म निभाने हम !!

6 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

सही है-खूब उड़ाओ उड़ाने वाली चीजें-जैसे उड़न तश्तरी. बहुत उम्दा लिखा है, वाह!!

mahendra mishra ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति आपसे टेलिफोनिक बात कर बहुत अच्छा लगा .बहुत जल्द आपसे मुलाकात करूँगा .
धन्यवाद.
महेन्द्र मिश्रा
७२९ त्रिमूर्ति नगर जबलपुर
टेलीफोन 4042819

bavaal ने कहा…

Zarranavazi ke liye aap sabka bahut shukriya.

shailee ने कहा…

apke blog padhe bahut achha likhte hain .badhai

praney ! ने कहा…

nisandeh, aati sunder !

praney ! ने कहा…
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