मंगलवार, 10 जून 2008

बवाल मच रहा है....


बवाल मच रहा है, भड़की हैं सब दिशाएँ !

मुक्काबला है इस पे, के कितना लहू बहाएं ?

2 टिप्‍पणियां:

Amit K. Sagar ने कहा…

अब मैं क्या कहूं
जब सारीफिज़ा ही
वाही-वाही कर रही है...
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उम्दा, मुकम्मल. लिखते रहिये. रूबरू भी कराते रहिये.
सादर;
http://ultateer.blogspot.com

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सही.