मंगलवार, 10 जून 2008

इंसानियत का परचम...

जो नेक राह पर हैं, वो एक राह आएँ !

इंसानियत का परचम, फ़हरा के तो दिखाएँ !!

5 टिप्‍पणियां:

Amit K. Sagar ने कहा…

अब मैं क्या कहूं
जब सारीफिज़ा ही
वाही-वाही कर रही है...
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उम्दा, मुकम्मल. लिखते रहिये. रूबरू भी कराते रहिये.
सादर;
http://ultateer.blogspot.com

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत कठिन कार्य बता रहे हैं आज की दुनिया में.

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 16/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

***Punam*** ने कहा…

ख्याल तो उम्दा है.....
लेकिन मुश्किल भी.....!!

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत खूब!