बुधवार, 17 सितंबर 2008

आलसी काया .......(उड़नतश्तरी की पोस्ट पर सप्लीमेंट यहाँ से ..)

आदरणीय लाल साहेब की उड़नतश्तरी ने आलसी काया पर कुतर्कों की बड़ी ही लम्बी शानदार रजाई ओढा दी। मगर जल्दी जल्दी में एक देशी शेर दर्ज होना रह गया। बिज़ी थे तो मुझे आदेश दिया सप्लीमेंट में डाल देना । उसी के अनुपालन में लीजिये -

हाथ पाँव के आलसी और मुँह में मूँछें जाएँ
और मूँछ बिचारी का करै जब हाथ न फेरे जाएँ
-----क्या मालूम ?

4 टिप्‍पणियां:

seema gupta ने कहा…

हाथ पाँव के आलसी और मुँह में मूँछें जाएँ
"ha ha ah suplimentry addition sach mey lajvab kr gya"

Regards

दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…

अच्छा है।

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा ने कहा…

हाथ पाँव के आलसी और मुँह में मूँछें जाएँ
और मूँछ बिचारी का करै जब हाथ न फेरे जाएँ
-----क्या मालूम ?
Bahut badhiya .

मीत ने कहा…

बवाल है भाई.